वाशिंगटन/न्यूयॉर्क, 23 दिसंबर 2025 (सूचना पत्र विशेष संवाददाता): अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने दिसंबर 2025 में जेफ्री एपस्टीन के कुख्यात Epstein Files का एक और विशालकाय बैच जारी किया, जिसने वैश्विक मीडिया को हिला कर रख दिया। 11,000 से अधिक पेजों में फोटोज, फ्लाइट लॉग्स, ईमेल्स और कोर्ट दस्तावेज शामिल हैं, जो एपस्टीन के सेक्स ट्रैफिकिंग नेटवर्क के गहरे अंधेरे को सामने लाते हैं । यह रिलीज न केवल अमेरिकी राजनीति को झकझोर रही है, बल्कि भारतीय कनेक्शन्स पर भी सवाल उठा रही है ।
जेफ्री एपस्टीन कौन थे? संक्षिप्त परिचय
जेफ्री एपस्टीन एक अमेरिकी फाइनेंसर और कुख्यात यौन अपराधी था, जो ताकतवर नेताओं, कारोबारियों और सेलिब्रिटीज से नज़दीकी रिश्तों के लिए बदनाम हुआ । उनका जन्म 20 जनवरी 1953 को ब्रुकलिन, न्यूयॉर्क में हुआ और 10 अगस्त 2019 को मैनहट्टन की जेल में उनकी मौत हो गई, जहां वह नए यौन तस्करी केस में ट्रायल का इंतजार कर रहे थे । वॉल स्ट्रीट से जुड़े इस फाइनेंसर ने अपनी दौलत और नेटवर्क के ज़रिए कई हाई-प्रोफाइल लोगों से संबंध बनाए, लेकिन नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और तस्करी के संगीन आरोपों ने उन्हें कुख्याति दी । उनकी पार्टनर घिसलीन मैक्सवेल पर इन लड़कियों की भर्ती और नेटवर्क चलाने में मदद करने के आरोप साबित हुए, जिसके लिए उन्हें 2021 में सजा मिली ।
ताजा दस्तावेजों के सबसे चौंकाने वाले खुलासे
22-23 दिसंबर को जारी फाइल्स में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम एपस्टीन के प्राइवेट जेट ‘लोलिता एक्सप्रेस’ पर आठ उड़ानों के रिकॉर्ड के साथ सामने आया है, हालांकि कोई अपराधी गतिविधि का आरोप नहीं लगाया गया । पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की हॉट टब में मस्ती करती फोटो ने सुर्खियां बटोरी, जो एपस्टीन के द्वीप पर ली गई बताई जा रही है । कई पेज पूरी तरह ब्लैकआउट हैं, जिससे साजिश थ्योरीज़ को नई जान मिल गई – क्या शक्तिशाली लोग अभी भी छिपे हुए हैं?
भारतीय कनेक्शन: क्या कोई बड़ा नाम फंस गया?
हां, हालिया रिलीज में कुछ भारतीय नामों का जिक्र ईमेल्स, कैलेंडर एंट्रीज और मीटिंग प्रपोजल्स में मिला है, लेकिन ये मुख्य रूप से एपस्टीन के “नेम-ड्रॉपिंग” का हिस्सा हैं – कोई अपराधी गतिविधि या क्लाइंट लिस्ट से जुड़ाव साबित नहीं हुआ । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम 2019 के एक मैसेज में आया, जहां एपस्टीन ने स्टीव बैनन को बताया कि वह मोदी से मीटिंग फिक्स करने की कोशिश कर रहा है । केंद्रीय मंत्री हार्दिक सिंह पुरी के साथ 2014-2017 में कई शेड्यूल्ड मीटिंग्स का रिकॉर्ड है, जबकि उद्योगपति अनिल अंबानी का जिक्र 2017 के ईमेल्स में मोदी की US विजिट से जुड़ा है । फैक्ट-चेकर्स ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर वायरल क्लेम्स ज्यादातर अफवाहें हैं, और कोई गलत काम का सबूत नहीं ।
मीडिया का तूफानी कवरेज: लाइव अपडेट्स से वैश्विक हंगामा
CNN, CBS, BBC और Al Jazeera ने घंटों लाइव अपडेट्स चलाए, जहां एंकरों ने हर नई फोटो और डॉक्यूमेंट पर तीखी बहस की । ट्रंप प्रशासन पर ‘पार्शियल रिलीज’ के गंभीर आरोप लगे, जिसका बचाव करते हुए एक अधिकारी ने कहा कि संवेदनशील जानकारी पीड़ितों की सुरक्षा के लिए छिपाई गई । एपस्टीन पर बनी डॉक्यूमेंट्री ‘Jeffrey Epstein: Filthy Rich’ के व्यूज रातोंरात 430% उछल गए, जबकि YouTube पर लाखों वीडियोज ने इंडिया लिंक्स को हाइलाइट किया । भारतीय चैनल्स जैसे DD India ने एपस्टीन के ग्लोबल नेटवर्क में भारतीय नामों पर विशेष डिबेट चलाई ।
पीड़ितों की चीखें और राजनीतिक उथल-पुथल
पीड़ित संगठनों ने रिडैक्शन्स की कड़ी निंदा की, दावा किया कि इससे न्याय प्रक्रिया बाधित हो रही है । क्लिंटन ने बाकी फाइल्स को तुरंत जारी करने की मांग की, जबकि ट्रंप ने इन्हें ‘घिनौना और फर्जी’ करार दिया । DOJ ने स्पष्ट किया कि रिलीज रोलिंग बेसिस पर जारी रहेगी, लेकिन कई फाइल्स अभी भी सीलबंद हैं । यह मामला अमेरिकी एलीट क्लास के भ्रष्टाचार को उजागर करता है, जहां अमीर और ताकतवर लोग कानून से ऊपर दिखते हैं
भविष्य की उम्मीदें: क्या और बड़े नाम गिरेंगे?
वकीलों का अनुमान है कि अगले बैच में और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं, खासकर एपस्टीन के फाइनेंशियल नेटवर्क पर । ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग पर असर पड़ रहा है, जहां एपस्टीन हैंडलिंग को उनकी सबसे कमजोर कड़ी बताया जा रहा । यह स्टोरी न केवल न्याय की लड़ाई है, बल्कि सत्ता के गलियारों में छिपे रहस्यों की भी – क्या दुनिया तैयार है पूरे सच को झेलने के लिए?
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