भारत की प्रगति में कृषि सदियों से आधारशिला रही है। “कृषि नीति प्रभाग” (Agriculture Policy Division) देश में कृषि-आधारित परिवर्तन को आगे बढ़ाने में एक अहम भूमिका निभा रहा है। यह प्रभाग नवाचार, शोध, नीति निर्माण और राज्य-केंद्र सहयोग के माध्यम से किसानों को सशक्त बनाकर विक्सित भारत 2047 के सपने को साकार करने की दिशा में अग्रसर है।
नीति निर्माण और विश्लेषण: कृषि सुधारों की रीढ़
कृषि नीति प्रभाग राज्यों में रणनीतिक नीति निर्माण और साक्ष्य-आधारित विश्लेषण के जरिए कृषि विकास को नई दिशा देता है।
- केंद्रीय योजनाओं की प्रभावशीलता पर फीडबैक प्रदान करता है।
- EFC/SFC प्रस्तावों, कैबिनेट नोट्स और अन्य उच्च-स्तरीय दस्तावेज़ों का मूल्यांकन करता है ताकि राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप कृषि नीतियाँ लागू हो सकें।
- मंत्रालयों के साथ समन्वय कर लक्षित हस्तक्षेपों को तेज़ी से आगे बढ़ाता है।
शोध और ज्ञान विनिमय: डेटा से नीति तक का सफर
यह प्रभाग कृषि से जुड़ी चुनौतियों और अवसरों पर लगातार शोध करता है। इसमें शामिल हैं —
- फसल विविधीकरण और कृषि प्रदर्शन का विश्लेषण
- पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) को प्रोत्साहन
- खेती-बाज़ार सुधार, मूल्य समर्थन योजनाएँ, और कृषि व्यापार नीतियाँ
- महिला सशक्तिकरण तथा शासन सुधार
साथ ही, यह विभाग भविष्य की कृषि परिदृश्य (visioning & scenario analysis) तैयार कर रहा है जिससे बदलते आर्थिक, पर्यावरणीय और तकनीकी प्रभावों को समझा जा सके।
संवाद और रणनीतिक विकास: सहयोग से समृद्धि की ओर
कृषि नीति प्रभाग अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर संवाद और सहयोगात्मक मंचों पर भारत की कृषि नीतियों का प्रतिनिधित्व करता है।
इसके माध्यम से —
- कृषि, पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र के लिए अभिनव, बजट-अनुकूल रणनीतियाँ तैयार की जाती हैं।
- सतत कृषि विकास और ग्रामीण आजीविका सुधार हेतु पहलें की जाती हैं।
राज्य स्तरीय सहभागिता और निगरानी
राज्यों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए यह प्रभाग जमीनी स्तर पर होने वाले परिवर्तनों पर नज़र रखता है।
- राज्य सरकारों के साथ संवाद कर योजना कार्यान्वयन में आने वाली बाधाओं को दूर किया जाता है।
- प्रमुख योजनाओं की प्रगति पर निगरानी रखी जाती है।
- कृषि प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और ग्रामीण रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
प्रमुख साझेदार
- कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
- मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय
- उर्वरक और रासायनिक मंत्रालय
- सहकारिता मंत्रालय
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय
- वाणिज्य मंत्रालय
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)
- खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO)
- एशियाई विकास बैंक (ADB)
- अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान (IFPRI)
- एग्रीबिज़नेस उद्योग, निर्यातक, और किसान समुदाय
निष्कर्ष
“कृषि नीति प्रभाग” भारत के कृषि क्षेत्र को सिर्फ आत्मनिर्भर बनाने का नहीं, बल्कि उसे वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम करने का विजन लेकर आगे बढ़ रहा है। नीति, शोध, सहयोग और नवाचार के इस संगम से भारत की खेती न केवल लाभकारी बन रही है, बल्कि आने वाले वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था में एक सशक्त स्तंभ साबित होगी।