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Budget 2026 से पहले बड़े डायरेक्ट टैक्स सुधारों का ऐलान किया: निवेशकों और आम नागरिकों को मिलेगी बड़ी राहत

Budget 2026
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पटना, 21 जनवरी 2026: भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने बजट 2026 से ठीक पहले डायरेक्ट टैक्स सुधारों का बड़ा ऐलान किया है। इन सुधारों का उद्देश्य टैक्स प्रणाली को सरल बनाना, निवेश को बढ़ावा देना और करदाताओं के लिए अनुपालन आसान करना है। बजट 1 फरवरी को पेश होगा, और ये बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे। आइए जानते हैं इन सुधारों की प्रमुख बातें।

निवेश और उद्योग क्षेत्र को मिलेंगी विशेष छूटें

वित्त मंत्रालय ने निवेश और उद्योग प्रोत्साहन पर विशेष फोकस किया है। मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं:

  • वैकल्पिक निवेश कोष (AIFs): कैटेगरी I और II AIFs द्वारा रखे गए सिक्योरिटीज को अब कैपिटल एसेट माना जाएगा। इससे ट्रांसफर पर कैपिटल गेन टैक्स लागू होगा, न कि बिजनेस इनकम टैक्स। यह बदलाव विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के बराबर लाभ देगा।
  • स्टार्टअप्स के लिए एक्सटेंशन: सेक्शन 80-IAC के तहत स्टार्टअप्स को शामिल होने की अंतिम तारीख 31 मार्च 2030 तक बढ़ाई गई। पहले 10 सालों में 3 लगातार वर्षों के लिए 100% लाभ कटौती मिलेगी।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग: गैर-निवासियों को सेवाएं देने पर सेक्शन 44BBD के तहत 25% ग्रॉस रसीद पर डीम्ड प्रॉफिट टैक्सेशन।
  • IFSC यूनिट्स: इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) में शिप-लीजिंग, इंश्योरेंस और ट्रेजरी सेंटर्स को 31 मार्च 2030 तक टैक्स छूट बढ़ाई गई।

ये कदम भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स और फाइनेंशियल हब बनाने में मदद करेंगे।

व्यक्तिगत करदाताओं को मिली बड़ी राहत

व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स के लिए भी कई राहतें हैं, जो आम आदमी को फायदा पहुंचाएंगी:

  • नेशनल सेविंग्स स्कीम (NSS): 29 अगस्त 2024 या उसके बाद निकासी पर पूर्ण टैक्स छूट। सीनियर सिटिजंस को विशेष लाभ।
  • NPS वात्सल्य: नाबालिग के पेंशन अकाउंट में माता-पिता का योगदान पर ₹50,000 अतिरिक्त कटौती (सेक्शन 80CCD(1B) के तहत)।
  • प्रॉपर्टी टैक्स: दो प्रॉपर्टीज पर शून्य वार्षिक मूल्य दावा, बिना नौकरी के कारण गैर-रहवासी साबित करने की जरूरत।

ये बदलाव टैक्स सेविंग को आसान बनाएंगे।

मुकदमेबाजी कम करने के उपाय

लिटिगेशन रिडक्शन पर जोर देते हुए मंत्रालय ने ये कदम उठाए:

  • ट्रांसफर प्राइसिंग: आकलन के लिए 3 साल की ब्लॉक पीरियड।
  • सेफ हार्बर नियम: टर्नओवर थ्रेशोल्ड ₹200 करोड़ से बढ़ाकर ₹300 करोड़। EV कंपोनेंट्स जैसे सेक्टर शामिल।
  • चैरिटेबल ट्रस्ट: छोटे ट्रस्ट्स के लिए रजिस्ट्रेशन वैलिडिटी 5 से बढ़ाकर 10 साल।

इनसे टैक्स कोर्ट केस 30-40% कम हो सकते हैं।

निष्कर्ष: बजट 2026 में और क्या उम्मीदें?

ये डायरेक्ट टैक्स सुधार निवेशकों, स्टार्टअप्स और आम नागरिकों को मजबूत आधार देंगे। बिहार जैसे राज्यों में उद्योग विकास को बढ़ावा मिलेगा।


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