दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब घोटाले में RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव, पत्नी राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव समेत परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ IPC की धारा 120B (आपराधिक षड्यंत्र), 420 (धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय कर दिए हैं। सीबीआई की विशेष अदालत ने 41 से अधिक आरोपियों पर चार्जशीट के आधार पर यह फैसला सुनाया, जबकि 52 में से कई को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
जमीन के बदले नौकरी घोटाला की पूरी कथा
2004 से 2009 के बीच रेल मंत्री रहे लालू प्रसाद ने बिहार से ग्रुप-डी के 46-50 रेलवे कर्मचारियों की भर्ती बिना विज्ञापन या परीक्षा के कराई। बदले में इनके परिवार ने लालू परिवार को पटना, गुरुग्राम, दिल्ली में करोड़ों रुपये कीमत की जमीनें सौंप दीं। उदाहरणस्वरूप, किशुन देव राय ने पटना में 3,375 वर्ग फुट जमीन मात्र 3.75 लाख रुपये में राबड़ी देवी को दी, जिसका वास्तविक मूल्य कई गुना अधिक था। कोर्ट दस्तावेजों में 26 लाख में 4 करोड़ की जमीनें लेने का खुलासा हुआ।
मुख्य आरोपी और उनकी भूमिका
- लालू प्रसाद यादव: अधिकारियों पर दबाव डालकर फर्जी उम्मीदवारों को नौकरी दिलाई।
- राबड़ी देवी: अधिकांश जमीनें उनके नाम रजिस्टर्ड।
- तेजस्वी प्रसाद यादव: RJD नेता, संपत्ति लाभ में नाम।
- तेजप्रताप यादव: सशरीर कोर्ट में हाजिर।
- अन्य: मीसा भारती, हेमा यादव, पूर्व रेल अधिकारी। ईडी को मनी लॉन्ड्रिंग केस चलाने की राष्ट्रपति मंजूरी मिल चुकी।
कोर्ट ने कहा कि यह सुनियोजित साजिश थी, जिसमें गरीब बिहारियों के फर्जी कागजातों से भर्ती हुई। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2025 में लालू की स्टे याचिका खारिज की थी। मुकदमे की अगली सुनवाई 15 फरवरी को निर्धारित।
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