आरा, बिहार। भोजपुर जिले के वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय (वीकेएसयू) से संबद्ध 29 कॉलेजों को सात सत्रों (2014-17 से 2021-24) का करीब 318 करोड़ रुपये का अनुदान लंबित है। छात्र-छात्राओं की उत्तीर्णता प्रतिशत पर आधारित यह फंडिंग शिक्षकों-कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और कॉलेज संचालन के लिए जरूरी है, लेकिन शिक्षा विभाग की लापरवाही से हजारों परिवार परेशान हैं।
अनुदान वितरण में लंबी जद्दोजहद
विश्वविद्यालय ने सभी आवश्यक कागजात शिक्षा विभाग को सौंप दिए, लेकिन पत्राचार के बावजूद कोई राहत नहीं। पिछले दो सालों में सिर्फ 5 कॉलेजों को पैसा मिला, बाकी 29 का इंतजार। सत्रवार ब्रेकअप: 2014-17, 2015-18, 2016-19, 2017-20, 2018-21, 2019-22, 2020-23 और 2021-24। कॉलेज प्रबंधनों ने उपयोगिता प्रमाण-पत्र जमा कर दिए, फिर भी विभाग टालमटोल कर रहा।
शिक्षकों की दर्दभरी कहानी
डॉ. शिव नाथ पांडेय और डॉ. हरिओम चौबे जैसे वरिष्ठ शिक्षक बताते हैं, “कॉलेजों में जवानी गुजार दी, लेकिन अनुदान नसीब नहीं। 1983-84 के बाद कोई सरकारीकरण नहीं हुआ, नियमितीकरण की उम्मीद टूटी।” सैकड़ों शिक्षक-कर्मी विश्वविद्यालय और विभाग के चक्कर काट रहे। आर्थिक तंगी से परिवार टूटने की कगार पर, कई कॉलेजों में वेतन देरी से हो रहा।
वित्तीय संकट और नीलामी का खतरा
इसके अलावा, वीकेएसयू पर आरा नगर निगम का टैक्स बकाया है, जिससे नीलामी की धमकी मिल रही। कुछ कॉलेजों में आंतरिक विवाद से फंडिंग रुकी, जबकि राज्य सरकार ने राशि विश्वविद्यालय को ट्रांसफर कर दी। तकनीकी कारणों का हवाला देकर वितरण रुक गया। शिक्षक संगठन आंदोलन की तैयारी में हैं।
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