ढाका, 23 दिसंबर 2025 (सूचना पत्र विशेष): बांग्लादेश के युवा नेता शरीफ उस्मान हादी (Usman Hadi) की हत्या की जांच में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। इंकिलाब मंच के प्रवक्ता हादी की 12 दिसंबर को ढाका के बिजयनगर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, और मुख्य आरोपी फसील करीम मसूद (Faisal Karim Masud) अभी भी फरार है। बांग्लादेश सरकार ने मामले को स्पीडी ट्रायल ट्रिब्यूनल के तहत डाल दिया है, जो 30 दिनों में फैसला सुनाएगा । भारत के हितों के खिलाफ इस घटना का इस्तेमाल कर बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है।
उस्मान हादी का महत्व: भारत-समर्थक युवा क्रांतिकारी
उस्मान हादी (32 वर्षीय) जुलाई 2024 की छात्र आंदोलन के प्रमुख नेता थे, जिन्होंने शेख हसीना की सत्ता उखाड़ फेंकी। इंकिलाब मंच के प्रवक्ता के रूप में उन्होंने लोकतंत्र और पारदर्शिता की मांग की, जो भारत के पड़ोसी हितों के अनुकूल था । हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में हिंसा भड़क गई, जो स्पष्ट रूप से भारत-विरोधी ताकतों को फायदा पहुंचा रही है। भारत ने हमेशा बांग्लादेश के लोकतांत्रिक आंदोलनों का समर्थन किया है, लेकिन इस हत्या ने क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल दिया ।
हत्यारा फसील करीम मसूद: अपराधी और जिहादी पृष्ठभूमि
मुख्य आरोपी फसील करीम मसूद उर्फ दाऊद खान पटुखाली के बाउफोल उपजिले का निवासी है। वह प्रतिबंधित बांग्लादेश छात्र लीग (BCL) का पूर्व नेता है, जिसका शेख हसीना सरकार से गहरा नाता था । सीसीटीवी फुटेज से साबित हुआ कि मसूद ने मोटरसाइकिल से हादी को सिर में गोली मारी। उसका आपराधिक इतिहास लंबा है – 2024 में एक स्कूल से 17 लाख टका की लूट में विदेशी पिस्तौल के साथ गिरफ्तार हुआ, लेकिन जमानत पर बाहर आ गया । पुलिस का मानना है कि वह बांग्लादेश में ही छिपा है और लोकेशन बदल रहा है। उसके सहयोगी कबीर को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है ।
जांच की प्रगति: ट्रैवल बैन और 127 करोड़ का काला पैसा
पुलिस ने मसूद पर ट्रैवल बैन और लुकआउट नोटिस जारी किया है। सीआईडी ने हत्या से जुड़े 127 करोड़ टका के संदिग्ध बैंक लेन-देन का पर्दाफाश किया, जो बड़े षड्यंत्र की ओर इशारा करता है । गृह सलाहकार ने कहा कि खुफिया एजेंसियां मुख्य शूटर की तलाश में जुटी हैं, और मामला मर्डर सेक्शन 302 के तहत दर्ज है । भारत ने इस जांच का समर्थन किया है, क्योंकि यह क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़ा है।
अल्पसंख्यकों पर निशाना: भारत-विरोधी प्रोपेगैंडा का हथियार
हादी की हत्या का फायदा जेएमए (जमात-ए-इस्लामी) और शिबिर जैसे कट्टरपंथी समूह ले रहे हैं, जो भारत को फर्जी रूप से फंसाने की कोशिश कर रहे । हादी के समर्थक संगठन ने भारत पर आरोप लगाए, जिससे ढाका में भारत-समर्थक अखबारों पर हमले हुए और अल्पसंख्यक हिंदुओं को टारगेट किया गया । बीएनपी नेता ने भी जमात पर हत्या का संदेह जताया। यह साफ षड्यंत्र है जो भारत के खिलाफ नफरत भड़काकर बांग्लादेश को अस्थिर करने का प्रयास है ।
चीन-पाकिस्तान का संभावित हाथ: ISI का पुराना खेल
हादी जैसे भारत-समर्थक नेता की हत्या में पाकिस्तान की ISI और चीन का संलिप्तता संदेहास्पद है। हसीना सरकार के पतन के बाद चीन-पाकिस्तान गठजोड़ बांग्लादेश को अपने प्रभाव में लाने की फिराक में है । मसूद जैसे अपराधियों को फंडिंग और हथियार ISI के जरिए मिले हो सकते हैं, जैसा कि सीपीईसी और बीआरआई प्रोजेक्ट्स में पाक-चीन का हस्तक्षेप दिखता है। भारत को बदनाम कर अल्पसंख्यकों पर अत्याचार भड़काना उनका रणनीतिक हथियार है, जो बांग्लादेश की प्रगति रोकने की साजिश है ।
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