कर्नाटक की सियासत में 2019 एक ऐसा साल रहा, जब वहां की सत्ता किसी TV सीरियल की तरह उलझनों और ट्विस्ट से भरी हुई दिखी। कांग्रेस-जेडीएस की गठबंधन सरकार और विपक्षी बीजेपी के बीच सत्ता की खींचतान किसी हाई-वोल्टेज ड्रामे से कम नहीं थी।
सिद्धारमैया का ‘Black Sheep’ डायलॉग और पॉलिटिकल स्ट्रेटजी
जुलाई 2019 में, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने मीडिया से बातचीत में कहा, “बीजेपी के डर की वजह उसके अपने पार्टी के ‘black sheep’ हैं”। उनका इशारा उन विधायकों की तरफ था, जो निजी हित में कभी भी पार्टी को धोखा देकर वोटिंग में दूसरी पार्टी की मदद कर सकते हैं। यही तो भारत की राजनीति का सबसे इंटरेस्टिंग मोड़ है—पार्टी के अंदर छुपे ऐसे खिलाड़ी जो सामने तो अपने हैं, लेकिन मौके पर पासा पलट सकते हैं।
सरकार बचाने के लिए ‘रेज़ॉर्ट-पॉलिटिक्स’ का नया ट्रेंड
उस समय मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने अपनी सरकार को बचाने के लिए विश्वास मत की मांग की। इधर-उधर से लगातार इस्तीफे आ रहे थे, किसी का रुख स्पष्ट नहीं था। बड़े-बड़े नेताओं को एकजुट करने की कोशिश ‘रेज़ॉर्ट पॉलिटिक्स’ में बदल गई—यानी विधायकों को रिसॉर्ट्स में शिफ्ट किया गया ताकि कोई ‘पोचिंग’ यानी खरीद-फरोख्त न कर सके। ये दृश्य कुछ हद तक हॉलीवुड की साजिशी फिल्मों-सी लगती है, जहां हर किरदार पर शक होता है!
विश्वास मत और वोटों का गणित
सदन में बहुमत का आंकड़ा 113 था, लेकिन इस्तीफों के बाद गठबंधन के सदस्य घटकर 100 हो गए और बीजेपी व दो निर्दलीयों के साथ BJP का आंकड़ा 107 पहुँच गया। बहुमत के लिये कांग्रेस-जेडीएस को ‘black sheep’ पर भरोसा था, लेकिन बीजेपी भी अपनी स्ट्रैटेजी में व्यस्त थी।
सुप्रीम कोर्ट, स्पीकर और ‘status quo’ ड्रामा
इस्तीफों और अयोग्यता की कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। कोर्ट ने मामले को मंगलवार तक टालते हुए ‘status quo’ का आदेश दिया, यानी फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा। ये एक तरह से ‘Suspense’ का नया एपिसोड शुरू हो गया।
अतीत से सीखे गए सबक: ‘Aaya Ram, Gaya Ram’ और ऑपरेशन लोटस
देश में राजनीतिक दल-बदल कोई नई बात नहीं है। 1967 में हरियाणा के विधायक ‘गया राम’ ने 24 घंटे में तीन पार्टियां बदल दी थीं, तभी से भारतीय राजनीति में ‘Aaya Ram, Gaya Ram’ मुहावरा लोकप्रिय हो गया। कर्नाटक में भी 2008 में बीजेपी ने ‘ऑपरेशन लोटस’ के तहत कांग्रेस और जेडीएस के 20 से ज्यादा विधायकों को अपनी पार्टी में लाकर सरकार बनाई थी। 2019 की घटना भी उसी अंदाज की थी—13 कांग्रेस विधायकों ने इस्तीफा देकर बीजेपी का साथ पकड़ा।
महाराष्ट्र में भी हुआ था तगड़ा खेल
2022 में महाराष्ट्र के विधायकों ने पार्टी बदलने (defection) की मिसाल कायम की। एकनाथ शिंदे समेत 11 विधायकों ने शिवसेना से बगावत कर नए समीकरण बना दिए। इस ‘cross-voting’ की वजह से पूरी सरकार सिर के बल खड़ी हो गई थी।
लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए ‘Anti-Defection Law’
इतने सियासी दांव-पेंच और बार-बार पार्टी बदलने के खेल के बाद 1985 में ‘Anti-Defection Law’ लागू हुआ, ताकि विधायकों के बार-बार दल बदल से लोकतंत्र कमजोर न हो। फिर भी, राजनीतिक पार्टियां loopholes ढूंढ ही लेती हैं और ‘black sheep’ राजनीति का अहम हिस्सा बने हुए हैं।
निष्कर्ष: भविष्य की राजनीति में ‘Black Sheep’ की भूमिका
कर्नाटक का 2019 का विश्वास मत और ‘black sheep’ वाला प्रसंग भारतीय राजनीति की बड़ी सच्चाई को उजागर करता है—पॉलिटिक्स में कब कौन किसके साथ जाना ले, स्पष्ट कहना मुश्किल है। अतीत में ‘Aaya Ram, Gaya Ram’ और ‘ऑपरेशन लोटस’, महाराष्ट्र की घटनाएं, और आज की ‘रेज़ॉर्ट पॉलिटिक्स’—इन सबमें ‘black sheep’ अपनी भूमिका निभाते रहे हैं।