शशि थरूर वंशवाद बयान प्रमुख हाइलाइट्स:
- शशि थरूर ने वंशवाद खत्म कर योग्यता पर जोर दिया।
- कांग्रेस नेताओं ने नेहरू-गांधी परिवार के बलिदान और योग्यता का बचाव किया।
- लोकतंत्र में जनता के निर्णय की अहमियत पर जोर।
- वंशवाद कांग्रेस के अलावा हर क्षेत्र में फैला हुआ है।
- भाजपा ने थरूर के बयान को परिवारवाद की पोल खोलने वाला बताया।
- थरूर और कांग्रेस नेतृत्व के बीच तनाव जारी।
नेहरू-गांधी परिवार की सोच पर थरूर का सवाल
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने हाल ही में राजनीति में ‘वंशवाद’ खत्म कर योग्यता पर जोर देने की बात कही, जिससे पार्टी के अंदर तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने नेहरू-गांधी परिवार के बलिदान को याद दिलाते हुए कहा कि देश के लिए इन्होंने अपना जीवन समर्पित किया है और यहां तक कि उन्होंने थरूर से पूछा कि क्या देश में कोई और ऐसा परिवार है जो उनके बराबर हो। उन्होंने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू सबसे सक्षम प्रधानमंत्री थे और इंदिरा-राजीव गांधी ने अपनी जान तक दे दी। तिवारी का कहना था कि अगर गांधी परिवार को ‘वंशवाद’ कहा जाता है तो और कौन सा परिवार ऐसा है जिसने इतनी सेवा की हो।
पार्टी में असंतोष और जवाबी हमले
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि लोकतंत्र में जनता ही निर्णय करती है, जिससे कोई यह तय नहीं कर सकता कि किसी नेता का बेटा चुनाव लड़ नहीं सकता। यह स्थिति हर क्षेत्र में देखी जाती है। वहीं, कांग्रेस के उदित राज ने वंशवाद के खिलाफ कहा कि यह केवल राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि हर क्षेत्र में फैला है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव टिकट अक्सर जाति और परिवार के आधार पर बांटे जाते हैं, और अपराधी नेताओं का होना समाज की वास्तविकता दर्शाता है।
थरूर का लेख: वंशवाद से होती है राजनीति की गिरावट
थरूर ने अपने लेख में लिखा कि जब राजनीतिक शक्ति परिवार के वंश के आधार पर तय होती है, न कि योग्यता और जनता के साथ जुड़ाव से, तो इससे शासन की गुणवत्ता प्रभावित होती है। उन्होंने नेहरू-गांधी परिवार के योगदान को स्वीकारा, लेकिन इस सोच को जन्मसिद्ध अधिकार मानकर राजनीति में फैली वंशवाद की व्यापकता पर सवाल उठाया।
भाजपा ने थरूर के बयान को बनाया हथियार
भारतीय जनता पार्टी ने थरूर के बयान को भारतीय राजनीति में परिवारवाद की वास्तविकता दर्शाने वाला करार दिया। बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे नेपो किड राहुल गांधी और छोटा नेपो किड तेजस्वी यादव पर निशाना बताते हुए कहा कि यह एक सीधा हमला है।
कांग्रेस के भीतर तनाव की बढ़ती लकीरें
थरूर का कांग्रेस नेतृत्व से रिश्ता पहले से ही तनावपूर्ण था, खासकर जब उन्होंने पार्टी अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ा था। उनका नाम ऑपरेशन सिंदूर जैसे सरकारी अभियान में शामिल नहीं किया गया, जिससे पार्टी में दूरी बढ़ी। हालांकि बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें अमेरिका समेत अन्य देशों में प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने के लिए आमंत्रित किया था। थरूर के हालिया बयानों और सोशल मीडिया पोस्टों ने पार्टी में उनकी स्थिति को और जटिल बना दिया है।