IndiGo इस समय खबरों में है क्योंकि देश की सबसे बड़ी एयरलाइन होते हुए भी उसने हज़ारों फ्लाइट अचानक कैंसिल या डिले कर दीं, जिससे यात्रियों और सरकार – दोनों की नाराज़गी बढ़ गई। सरकार और DGCA अब उस पर सख़्त एक्शन, शेड्यूल कटौती और जांच की बात कर रहे हैं, ताकि भविष्य में कोई भी एयरलाइन यात्रियों के साथ ऐसा “शॉक” न दे सके।
अभी IndiGo खबरों में क्यों है?
- दिसंबर 2025 की शुरुआत से IndiGo ने लगातार बहुत बड़ी संख्या में फ्लाइट्स रद्द या भारी देरी से चलाईं, जिससे देशभर के एयरपोर्ट्स पर अफरा‑तफरी मच गई।
- DGCA और एविएशन मंत्रालय के अनुसार, यह संकट नई Flight Duty Time Limitations (FDTL) Phase‑II rules लागू होने के बाद क्रू प्लानिंग और तैयारी की कमी के कारण और बढ़ गया।
- रिपोर्टों के मुताबिक 1–7 दिसंबर के बीच लाखों PNR कैंसिल हुए और यात्रियों को सैकड़ों करोड़ रुपये का रिफंड देना पड़ा।
सरकार से टकराव / अनबन किस बात पर?
- DGCA ने पहले IndiGo को उसके नेटवर्क‑वाइड डिसरप्शन के कारण फ्लाइट शेड्यूल 5% घटाने को कहा, जिसे बाद में सरकार ने बढ़ाकर कम से कम 10% कर दिया।
- सिविल एविएशन मंत्री ने साफ कहा कि DGCA ने FDTL rules लागू होने से पहले ही सभी एयरलाइंस को पर्याप्त समय और गाइडलाइन दी थीं, लेकिन IndiGo ने समय पर तैयारी नहीं की और अब उसकी लापरवाही की जांच होगी।
- DGCA ने IndiGo के CEO और COO को शो‑कॉज़ नोटिस जारी कर दिया है और एक पैनल बना कर यह जांच कर रहा है कि एयरलाइन ने क्यों बार‑बार छूट (exemptions/variations) मांगने पर ज़ोर दिया, लेकिन समय से क्रू मैनेजमेंट दुरुस्त नहीं किया।
IndiGo किन समस्याओं से जूझ रही है?
- क्रू अवेलेबिलिटी और FDTL: नए नियमों के चलते पायलट‑केबिन क्रू के काम और आराम के घंटे ज़्यादा सख़्ती से लागू होने लगे, जबकि IndiGo ने अपना शेड्यूल पहले से ज़्यादा टाइट रखा; अचानक बहुत सारे क्रू “अनउपलब्ध” दिखने लगे और फ्लाइट्स ग्राउंड करनी पड़ीं।
- ओवर‑शेड्यूलिंग: रिपोर्टों में आया कि विंटर 2025 शेड्यूल में IndiGo ने पिछले सीज़न की तुलना में हज़ारों अतिरिक्त डिपार्चर प्लान कर लिए थे, जो क्रू और ऑपरेशन की असल क्षमता से ज़्यादा थे।
- कॉस्ट प्रेशर और ब्रांड डैमेज: कैंसिलेशन से रिफंड, रीबुकिंग, होटल/केयर लागत, क्रू कॉस्ट और मुआवज़े का भारी बोझ पड़ा; साथ ही सोशल मीडिया पर “IndiGo crisis” हैशटैग से ब्रांड इमेज को भी झटका लगा।
आगे आने वाली संभावित समस्याएँ
- कड़े रेगुलेटरी एक्शन:
- DGCA इंडिगो के खिलाफ पेनल्टी, और सख़्त शेड्यूल कैप, या “दूसरी एयरलाइंस को स्लॉट ट्रांसफर” जैसे कदम उठा सकती है।
- अगर जांच में गंभीर लापरवाही साबित होती है, तो future में IndiGo के नए रूट/फ्लाइट अप्रूवल पर भी सख़्ती बढ़ सकती है।
- मार्केट शेयर पर असर:
- शॉर्ट‑टर्म में Indigo के कटे हुए शेड्यूल के स्लॉट दूसरे कैरियर्स (Vistara, Air India, Akasa आदि) को मिल सकते हैं, जिससे उनका मार्केट शेयर बढ़े और IndiGo की monopoly टाइप पकड़ थोड़ी ढीली हो।
- यात्री भरोसे में गिरावट:
- लगातार कैंसिलेशन और मिसहैंडल लगेज के मामलों से पासेंजर्स में “फुल बुकिंग लेकिन आधा भरोसा” वाली स्थिति बन सकती है, जिससे कॉर्पोरेट और हाई‑फ्रिक्वेंसी ट्रैवलर कुछ समय के लिए alternatives खोज सकते हैं।
संभावित समाधान और सुधार के रास्ते
- क्रू प्लानिंग और टेक्नोलॉजी अपग्रेड:
- IndiGo को अपनी rostering systems, fatigue‑risk management और AI‑based crew scheduling को मज़बूत करना होगा, ताकि FDTL जैसे नए नियमों का पालन करते हुए भी अचानक mass cancellations ना हों।
- यथार्थवादी फ्लाइट शेड्यूल:
- एविएशन मंत्रालय पहले ही कह चुका है कि “कोई भी एयरलाइन ऐसी स्थिति नहीं बना सकती जहाँ यात्रियों को घंटों अटके रहना पड़े”; इसलिए IndiGo को कुछ समय तक ग्रोथ की रफ्तार कम करके रिलायबिलिटी पर फोकस करना पड़ेगा।
- कस्टमर केयर और रिफंड डिसिप्लिन:
- सरकार ने रिफंड की डेडलाइन तय कर दी है और किराए में अनुचित बढ़ोतरी पर भी सख़्त मैसेज दिया है; IndiGo को प्रो‑एक्टिव SMS/ईमेल, ऑटोमैटिक रिफंड और वैकल्पिक फ्लाइट/होटल सपोर्ट से इमेज सुधारने की कोशिश करनी होगी।
- सरकार–एयरलाइन “अर्ली वार्निंग सिस्टम”:
- इस पूरे एपिसोड से सीख लेते हुए DGCA और मंत्रालय ऐसी व्यवस्था बना सकते हैं, जहाँ अगर किसी बड़े कैरियर की ऑपरेशनल हेल्थ बिगड़ने लगे तो जल्दी warning flags उठें और पब्लिक क्राइसिस बनने से पहले corrective steps लिए जा सकें।
संक्षेप में, IndiGo की मौजूदा मुसीबत सिर्फ़ “कुछ फ्लाइट लेट” की कहानी नहीं है, बल्कि प्लानिंग, रेगुलेशन और जिम्मेदारी – तीनों के टकराव का नतीजा बन गई है; आने वाले महीनों में दिखेगा कि कंपनी और सरकार मिलकर इसे “wake‑up call” बनाते हैं या “warning example”।
Leave a Reply