मोहनिया (कैमूर) | कैमूर जिले के मोहनिया प्रखंड में धान की कटनी के बाद खेतों में बचे अवशेष (पराली) को जलाने के मामले में प्रशासन ने अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई की है। कृषि विभाग ने सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों और जमीनी जांच के बाद मोहनिया के अलग-अलग गांवों से 26 किसानों को दोषी पाया है।
मुख्य बिंदु:
- कार्रवाई का आधार: विभाग को सैटेलाइट के जरिए खेतों में आग लगने की ‘लोकेशन’ मिली थी। जब कृषि समन्वयकों (Agriculture Coordinators) ने मौके पर जाकर जांच की, तो पराली जलाने की पुष्टि हुई।
- सख्त सजा: इन सभी 26 किसानों का किसान पोर्टल पर निबंधन (Registration) ब्लॉक कर दिया गया है।
- सरकारी लाभ से वंचित: अब ये किसान अगले 3 सालों तक सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं उठा पाएंगे। इसमें शामिल हैं:
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (6000 रुपये सालाना)।
- डीजल अनुदान और खाद-बीज पर सब्सिडी।
- कृषि यंत्रों (जैसे ट्रैक्टर या थ्रेशर) पर मिलने वाली छूट।
- चेतावनी: जिला कृषि पदाधिकारी ने साफ कर दिया है कि अगर कोई किसान दोबारा पराली जलाते पकड़ा गया, तो उस पर जुर्माना लगाने के साथ-साथ FIR (प्राथमिकी) भी दर्ज की जाएगी।
जनता की प्रतिक्रिया:
- चिंता: मशीन से कटनी (Harvester) के बाद बचे अवशेषों को हटाने का कोई सस्ता विकल्प नहीं होने के कारण वे मजबूरी में आग लगाते हैं।
- समर्थन: वहीं, कुछ लोगों ने पर्यावरण और प्रदूषण (कोहरे के साथ धुंध) को देखते हुए इस कार्रवाई को सही ठहराया है।
यह खबर इस समय मोहनिया के ग्रामीण इलाकों में चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि इसका सीधा असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। प्रशासन का उद्देश्य अन्य किसानों को यह संदेश देना है कि वे पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाएँ।
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